Constitution Amendment: “संविधान में फौज फिट करने चला पाकिस्तान!”

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

पाकिस्तान की राजनीति में फिर वही पुरानी स्क्रिप्ट — “जनता के नाम पर सत्ता, सत्ता के नाम पर फौज”।
26वें संशोधन के बाद अब 27वां संविधान संशोधन आ रहा है — और इसमें सेना को ऐसा VIP Constitutional Pass मिलने जा रहा है कि खुद संविधान भी सलाम ठोक देगा।

संवैधानिक अदालत या सेना की अदालत?

सरकार चाहती है कि देश में एक ‘Constitutional Court’ बने, लेकिन विपक्ष पूछ रहा है — “भाई ये कोर्ट जनता के लिए बनेगा या जेनरल्स के लिए?”
बिलावल भुट्टो ने कहा कि उनकी पार्टी (PPP) इसका समर्थन करेगी — क्योंकि ये चार्टर ऑफ डेमोक्रेसी का हिस्सा है।
पर ट्विटर (माफ़ कीजिए, X) पर लोग पूछ रहे हैं — “बिलावल साहब, लोकतंत्र का चार्टर पढ़ रहे हैं या ‘चार्टर ऑफ आर्मी’?”

एनएफसी फॉर्मूला: पैसे की पॉलिटिक्स

पाकिस्तान का नेशनल फाइनेंस कमीशन (NFC) फॉर्मूला कहता है कि प्रांतों को राजस्व में हिस्सा मिलेगा। लेकिन अब फेडरल गवर्नमेंट कह रही है — “भाई थोड़ा हिस्सा हमें भी दे दो, रक्षा बजट भी बढ़ गया है।”
मतलब साफ़ है — फौज का खर्च बढ़ा है, तो संविधान को थोड़ा झुकना ही पड़ेगा।

अनुच्छेद 243: ‘Field Marshal’ की Fielding

अब बात करते हैं Article 243 की — जहाँ लिखा है कि राष्ट्रपति सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर होता है। लेकिन अब संशोधन के ज़रिए जनरल आसिम मुनीर को Field Marshal बनाकर संवैधानिक सुरक्षा दी जा रही है। यानी अब सेना प्रमुख सिर्फ “सर” नहीं, “संविधान का सुपर सर” होंगे।

“पाकिस्तान में संविधान बदलता है, लेकिन सेना नहीं। फर्क सिर्फ रैंक और टाइटल में आता है।”

“संविधान नहीं, Commission of Command”

“26वें संशोधन का अधूरा एजेंडा अब 27वें से पूरा होगा।” “बाकी सब तो दिखावा है, असली मकसद सेना प्रमुख को संवैधानिक सुरक्षा देना है।”

मतलब ये कि संविधान को अपडेट नहीं किया जा रहा, बस आर्मी एक्ट का PDF वर्ज़न अपलोड किया जा रहा है।

चुनाव आयोग और बाकी बहाने

सरकार चाहती है कि Election Commission की नियुक्तियों में गतिरोध न रहे। पर विपक्ष कहता है — “भाई पहले लोकतंत्र तो रहे, फिर आयोग देखेंगे।” मौजूदा हालात में तो चुनाव आयोग भी कह रहा है — हमें भी थोड़ा ‘सेना सपोर्ट’ चाहिए!

27वां संशोधन पाकिस्तान की राजनीति को “लोकतंत्र से अनुशासन” की ओर ले जा रहा है। जहाँ संविधान किताब में रहेगा, और कमांड संविधान के ऊपर रहेगा।

मल्लाह के वोटवा में फँसी नेतन के नैया — अब काहे के भरोसा?

Related posts

Leave a Comment